"रंग हैं आशुओं की पलकों में, ज़िंदगी अक्श का इरादा है मैं जवां हूँ जिसकी धड़कन में, उसकी साँसों में भी पहरा है, एक ज़नाज़ा है गली में कूचों में सुनी गलियाँ यहाँ मातम में मेरे ज़ाने की कोशिश का असर अब कब्र के सायों में भी पहरा है" -विवेक जी |
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Saturday, January 9, 2010
"रंग हैं आशुओं की पलकों में"
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यह ज़िंदगी
"यह ज़िंदगी आख़िरी कहानी है,
दर्द की किश्तियों मैं
डोलती ज़वानी है,
फूल होने का दर्द
सिर्फ़ वो ही जाने
ज़िनकी अपनी फुलवारी है"
-विवेक जी
दर्द की किश्तियों मैं
डोलती ज़वानी है,
फूल होने का दर्द
सिर्फ़ वो ही जाने
ज़िनकी अपनी फुलवारी है"
-विवेक जी
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